माइक बिब्बी: किंग्स लीडर से वर्क-आउट वीर तक

सैक्रामेंटो युग के सबसे बड़े क्लच खिलाड़ियों में से एक, माइक बिब्बी बता रहे हैं अपने उल्लेखनीय शॉट्स, यादगार खुराफ़ातों और दिन-रात चलने वाले वर्क-आउट्स के बारे में।

सैक्रामेंटो में अपने साढ़े छह सीजन के दौरान, 6 फुट 2 इंच लम्बे और 195 पौंड वज़न वाले माइक बिब्बी ने फ्लोर पर भारी-भरकम भूमिका निभाई, किंग्स के कुछ बेहतरीन रन-एंड-गन आक्रमणों के सूत्रधार रहे और क्लच समय में बेझिझक जम्प शॉट्स लगाये।

आजकल BIG3 के घोस्ट बॉलर्स के कैप्टेन बिब्बी घंटों वेट रूम में बिताते हैं - कभी डम्ब-बेल उठाते, कभी उठ्ठक-बैठक करते तो कभी लेग-प्रेस मशीन चलाते - और यह उनके शरीर से साफ दिखाई देता है। सफ़ेद पोलो शर्ट की स्लीव से झलकते बाइसेप्स वाले 41 वर्षीय पॉइंट गार्ड, बास्केटबॉल खिलाड़ी से ज़्यादा किसी फुटबॉल टीम के विशालकाय लाइन-बैकर नज़र आते हैं।

पिछले दिनों उन्होंने अपनी एक फोटो इंटरनेट पर शेयर की थी, तब उनके मांसल शरीर ने तहलका मचा दिया था। इसके पीछे उनकी जेनेटिक्स और प्रोटीन-बहुल भोजन के साथ उनकी ज़बरदस्त मेहनत का सबसे बड़ा हाथ था।


“मैं हमेशा वर्क-आउट में लगा रहता हूँ,” उन्होंने बताया। “हफ्ते में तीन दिन, सवेरे तीन घंटे फुल बॉडी लिफ्ट्स करता हूँ और बाकी के दो दिन बैंड्स के साथ। मैं रोज़ जिम जाता हूँ और बाद में बास्केटबॉल खेलता हूँ और रात में फिर थोड़ी कसरत करता हूँ।"

चेरी हिल, न्यू जर्सी निवासी बिब्बी की यही कड़ी मेहनत, उन्हें धीमी गति वाले लेकिन ज़्यादा कठिन BIG3 में गिल्बर्ट एरेनास और क्वेंटिन रिचर्डसन जैसे अपने प्रतिद्वंद्वियों का सामना करने में मदद देती है। आइस क्यूब द्वारा स्थापित 3-ऑन-3 लीग में किंग्स का यह प्रतिष्ठित खिलाड़ी वर्ष 2017 और 2018 में असिस्ट में सबसे आगे और रिबाउंड में भी चोटी के आसपास रहा।

वैसे उनका कहना है कि उनका परिवर्तन उतना नाटकीय नहीं जैसा लगता है। NBA से रिटायर होने के बाद अब उनके पास समय और इच्छाशक्ति है जिससे वे अपना रूटीन सुधार सकते हैं।

“मेरा आकार तो हमेशा से ऐसा ही था; बस NBA टीमें चाहती ही नहीं थीं कि मैं लिफ्ट करूँ," वे कहते हैं। “अब मैं वही करता हूँ। मुझे वेट उठाना पसंद है, वर्क-आउट करना पसंद है और ज़्यादा मेहनत करना तो और भी ज़्यादा पसंद है।"

अपने पूरे प्रोफेशनल करियर के दौरान, वे गर्मियों में वज़न बढ़ने के बाद, हर साल अक्टूबर में ट्रेनिंग कैंप में हाज़िर हो जाते थे। उनके कोच उन्हें वज़न घटाने और वापस अपने खेलने वाले वज़न पर पहुँचने का निर्देश देते। बिब्बी अनिच्छा से बेंच प्रेस को छोड़कर ट्रेडमिल पर सवार हो जाते। उनका सुतवाँ बदन भले ही कम भव्य लगता था, लेकिन एथलेटिक और मानसिक दृष्टि से उसके कई, अलग तरह के फायदे थे।

1997 के नेशनल चैंपियन और 1998 में एरिज़ोना के प्लेयर ऑफ़ द इयर, माइक बिब्बी को ग्रिज़लीज़ ने सेकंड ओवर-ऑल ड्राफ्ट किया। अपने पहले तीन सालों में उन्होंने लगातार अपने प्रति गेम पॉइंट और असिस्ट के औसत में इज़ाफ़ा किया। लीग के सबसे सम्मानित युवा पॉइंट गार्ड्स में से एक, बिब्बी ने ऑल-रुकी फर्स्ट टीम में स्थान बनाया और वैंकूवर-मेम्फिस फ्रैंचाइज़ का सिंगल सीजन असिस्ट का रिकॉर्ड (2000-01 में 685) आज भी उन्हीं के नाम दर्ज है।

इसके बावजूद, ग्रिज़लीज़ 161 में से केवल 53 गेम्स जीतकर, वेस्टर्न कांफ्रेंस में आगे बढ़ने की मशक्कत कर रहे थे। तब के उसके मालिक माइकल हेज़ली ने खिलाड़ियों की अदला-बदली की संभावनायें तलाशना शुरू कर दिया था।

“माइकल हेज़ली ने मुझे विकल्प दिया,” बिब्बी याद करते हैं। “उन्होंने मुझसे कहा कि मैं ऐसी पाँच जगहों के नाम बताऊँ जहाँ मैं जाना चाहूँगा और मैंने उन्हें पाँच नाम बताये। उन्होंने पूछा, "इनमे से पहली जगह क्या है, जहाँ तुम खेलना चाहते हो?"

बिब्बी बहुत दिनों से सैक्रामेंटो की तेज़ रफ़्तार और बॉल शेयर करने की शैली के प्रशंसक थे। उन्होंने उसी का नाम लिया।

“मेरे ख़्याल से एक सप्ताह से भी कम समय में अदला-बदली हो गयी," उन्होंने बताया। “मैंने सोचा नहीं था कि ऐसा होगा। उस स्थिति में पहुँचना शायद मेरे करियर का सबसे अहम पड़ाव है।"

बिब्बी का खेल धमाकेदार न होकर ठोस था इसलिए उन्हें, अपने से ठीक उलट, जेसन विलियम्स की जगह लेने में शुरू में कुछ घबड़ाहट ज़रूर हुई। विलियम्स इम्प्रोवाइज करने में माहिर थे - पैरों के बीच से या पीठ के पीछे से पास देना, फ़ास्ट ब्रेक में 35 फुट के थ्री पॉइंटर लगाना - और इसी वजह से वे शहर के और लीग के पसंदीदा खिलाड़ी थे और नेशनल टीवी के हाईलाइट शोज़ में हमेशा नज़र आते थे।

लेकिन बिब्बी की यह घबड़ाहट जल्द ही दूर हो गयी, जब पहली बार ARCO एरीना में उतरते ही लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका भव्य स्वागत किया और अगले कुछ हफ़्तों में किंग्स की विजयों की संख्या बढ़ने के साथ स्टैंड्स में उनके नाम और नंबर वाली जर्सियों की संख्या भी बढ़ती चली गयी।

“क्या ज़बरदस्त प्रशंसक हैं ये,” वे कहते हैं। “मुझे पता था कि जेसन विलियम्स उनका फेवरेट है और उसकी जगह पर मुझे लाया गया था तो पता नहीं मैं उनसे क्या उम्मीद करूँI लेकिन उन्होंने तो मेरे साथ ऐसा बर्ताव किया जैसे मैं हमेशा से उनके साथ था। मुझे महसूस कराया कि यही मेरा घर है।"

ख़िताब की दावेदार टीम को निर्देशित करना भी नंबर 10 के लिए बेहद आसान रहा - शायद इसलिए भी क्योंकि वहाँ पहले से ही कई जमे-जमाये, प्रतिष्ठित और अनुभवी खिलाड़ी थे जिनके बीच ग़ज़ब की केमिस्ट्री और टीम-भावना मौजूद थी।

बिना बॉल के मूवमेंट, खुले हुए पेरिमीटर शॉट्स और बैक-डोर कट्स वाले प्रिंसटन ऑफेंस का इस्तेमाल करते हुए किंग्स ने उम्दा प्रदर्शन किया। हाई पोस्ट पर लीग के दो श्रेष्ठ पासिंग खिलाडियों - क्रिस वेबर और व्लादे दिवाक - के मौजूद होने की वजह से बिब्बी को पारंपरिक पॉइंट गार्ड की भूमिका नहीं निभानी पड़ी। उनके असिस्ट तो 8.4 प्रति गेम से घटकर 5.0 रह गये लेकिन किंग्स ने फ्रैंचाइज़-रिकॉर्ड 61 गेम्स में जीत हासिल की, जो ग्रिज़लीज़ के साथ उनके पूरे तीन साल के कार्यकाल से आठ अधिक है।

बिब्बी का कहना है कि इसकी सबसे बड़ी वजह और 2000 के दशक की किंग्स टीम की ख़ासियत यह थी कि उसका कोई भी खिलाड़ी - MVP के दावेदारों से लेकर बेंच के आखिरी व्यक्ति तक - अपने लिए नहीं खेलता था और न अपने आँकड़े बढ़ाने पर ज़ोर देता था। सर्वश्रेष्ठ स्टार्टिंग लाइन-अप में से एक, किंग्स में, स्कोर बनाने वाला दूसरा या तीसरा विकल्प होने के कारण पॉइंट गार्ड को किसी भी ऑल-स्टार टीम में नामित नहीं किया गया; लेकिन उन्हें अपने टीममेट्स की बात मानने से कभी गुरेज़ नहीं रहा और जब कभी उनमें से किसी को कोई पुरस्कार मिलता, वे हमेशा बहुत ख़ुश होते।

“वहाँ जाकर मुझे एहसास हुआ कि बास्केटबॉल किस तरह खेली जानी चाहिए," वे कहते हैं। “किसी को पॉइंट नहीं मिलते तो भी उनकी ईगो आड़े नहीं आती थी। टीम में जिस तरह के खिलाड़ी थे उनके बीच घुलमिल जाना बहुत आसान था। उन सबने मुझे ऐसे महसूस कराया जैसेकि मैं पाँच, छह, सात साल से उनके साथ हूँ।"




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“He has to lift.”

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ऐसे निकट संबंधों के कारण पूरी टीम के बीच हार्दिक भाईचारा था। रोड ट्रिप्स में कुछ खिलाड़ियों का दल सीधे पास के मॉल में पहुँच जाता, फ़ास्टफ़ूड रेस्टोरेंट में खाता-पीता, सी डी पसंद करता और लौटते समय सबके लिए स्नैक्स लेकर आता।

“टीम में ऐसे बहुत से लोग हैं जिनसे मैं आज तक बातचीत करता हूँ," बिब्बी कहते हैं। "जब कभी हम मिलते हैं, हमेशा लगता है जैसे एक ही परिवार के हैं।"

जहाँ तक प्रैक्टिकल जोक्स और मासूम शरारतों का सवाल है, उनके पीछे अकसर एक ही व्यक्ति का हाथ होता था और उसके लिए कुछ भी असंभव नहीं था।

एक दिन बिब्बी एक चमकीला ग्रे जम्प सूट पहनकर प्रैक्टिस के लिए आये। अगले दिन उनके लॉकर पर एक फ़ोटो चिपकी मिली, जिसमें 'ऑस्टिन पावर' फ़्रैंचाइज़ में, वर्नी ट्रॉयर द्वारा प्रसिद्ध बनाई गई मिनी-मी के शरीर पर बिब्बी का चेहरा चिपकाया हुआ था।

“सभी इसका मज़ाक बनाते रहे, लेकिन मुझे लगता है व्लादे सबसे आगे था," बिब्बी हँसकर बताते हैं। “उसी की ख़ुराफ़ात थी। वह मेरे सबसे अच्छे साथियों में से एक है। उसे हमेशा मज़े लेने की आदत थी। हम चाहे हारें या जीतें, वह वैसा ही रहता था।"

जब 2002 के प्ले-ऑफ़ शुरू हुए तब ऑल-बिज़नेस, नो-नॉनसेंस, कसी हुई किंग्स की टीम पहले राउंड में यूटा से आसानी से जीत गई और कॉंफ्रेंस सेमीफाइनल में डैलस को भी पराजित किया। लगातार तीसरे शो-डाउन में अब उसे अपने चिर प्रतिद्वंद्वी लेकर्स का सामना करना था।

काँटे की टक्कर वाले इस मुक़ाबले में सैक्रामेंटो ने लॉस एंजेल्स के डिफेंस की सबसे बड़ी कमज़ोरी का फ़ायदा उठाया जब उन्होंने बिब्बी और वेबर की दीवार खड़ी कर दी और पॉइंट गार्ड की फुर्ती की बदौलत पेहा स्तोयाकोविच और डग क्रिस्टी को थ्री-पॉइंटर्स के अवसर प्रदान कराये।

लेकर्स के फॉरवर्ड रोबर्ट हॉरी के चौंका देने वाले गेम विजेता शॉट के दो ही दिन बाद, गेम 5 के अंतिम क्षणों में बिब्बी, टाइम-आउट के बाद टीम-हडल से निकलते वेबर को एक तरफ ले गए।

किंग्स टीम उस समय एक पॉइंट से पिछड़ रही थी और उस गेम के साथ-साथ सीजन की जीत-हार भी दाँव पर लगी थी। बिब्बी जानते थे कि अगर बॉल वेबर के हाथ में आ गयी तो वे हरगिज़ नहीं चूकेंगे।

“वेबर हमारा ख़ास खिलाड़ी था,” बिब्बी कहते हैं। “मैंने उससे कहा- अगर तुम बॉल मुझे देने का दिखावा करते हो और ख़ुद शूट करते हो तो हो सकता है हम जीतें या यह भी हो सकता है कि हार जायें ..... लेकिन अगर तुम यह शॉट नहीं लेते तो मैं पक्का उसे ले लूँगा।"

सुनियोजित नाटक की तरह, बिब्बी ने बेसलाइन से बॉल वेबर की तरफ फेंकी, जिन्होंने लेकर्स गार्ड डेरेक फिशर से बचाते हुए उसे राइट विंग से वापस नंबर 10 को पास किया। बात के धनी बिब्बी ने शांति से उसे ड्रिबल किया और फिर 22 फुट का जम्प शॉट लगाया जो सीधा नेट में गया। टीम की इस जीत ने उन आलोचकों को भी खामोश कर दिया जो कह रहे थे कि हॉरी के चमत्कारी शॉट ने सैक्रामेंटो का आत्मविश्वास हिलाकर रख दिया है।

बिब्बी का यह "डैगर" उनके और उनकी टीम के अदम्य साहस और संतुलन का जीता-जागता सबूत है, हालाँकि यह ख़ुशी ज़्यादा दिन क़ायम नहीं रही। गेम 7 के ओवरटाइम में लेकर्स किंग्स से आगे निकल गये; लेकिन बिब्बी आज तक यही मानते हैं कि जीतने वाली टीम उनसे बेहतर नहीं थी।

“यह सबसे बुरा अनुभव था,” वे कहते हैं। “दुर्भाग्य से कुछ बातें हमारे पक्ष में नहीं गयीं... मुझे लगता है होनी को यही मंज़ूर था, लेकिन मैं जानता हूँ कि उस वर्ष हम NBA की बेस्ट टीम थे। मैं ही नहीं NBA में हर कोई यह जानता था। मैं सोचता हूँ हम उस साल चैंपियनशिप जीत सकते थे। दुःख इसी बात का है कि ऐसा हुआ नहीं।"

इसके बाद, बिब्बी के चार सीजन में हर बार किंग्स पोस्ट-सीजन तक पहुँचे, लेकिन मई 2003 में वेबर की घुटने की चोट ने न सिर्फ उनके करियर पर आघात किया, बल्कि टीम पर भी असर डाला। सैक्रामेंटो ने युवा खिलाड़ियों को भर्ती किया और रोस्टर को संतुलित करने और ख़िताबी दौड़ में बने रहने के लिए अपने स्थापित खिलाड़ियों को एक-एक करके बदल डाला।

बिब्बी, "ग्रेटेस्ट शो ऑन कोर्ट" युग के आखिरी स्टार थे, जो किंग्स को छोड़कर गये, जब फरवरी 2008 की एक अदला-बदली में सैक्रामेंटो के असिस्ट लीडर हॉक्स में शामिल हो गये। एक युवा टीम में अनुभवी खिलाड़ी के तौर पर उन्हें न सिर्फ अपनी पासिंग और आउटसाइड शूटिंग से टीम को बढ़ावा देना था, बल्कि व्लादे दिवाक से सीखे पाठ को दोहराते हुए पूरी टीम को एकसाथ जोड़कर भी रखना था।

"एटलांटा जाना और उन लोगों के लिए व्लादे की भूमिका निभाना शुरू से ही बड़ा मज़ेदार रहा," उन्होंने बताया। “मैं यह नहीं कहता कि मैंने ही टीम को प्ले-ऑफ़ तक पहुँचाया, लेकिन मैं समझता हूँ कि मेरे आने से टीम को जीतने में मदद ज़रूर मिली। मैंने उन्हें दिखाया कि देखो भाई, तुम बास्केटबॉल तो खेलते हो, लेकिन हमें एक-दूसरे के साथ इतने समय रहना है तो क्यों न उसका मज़ा लें। फिर जो होगा, देखा जायेगा।"

वॉशिंगटन, मायामी और न्यू यॉर्क में संक्षिप्त समय बिताने के साथ अपना NBA करियर समाप्त कर, 14 वर्ष के अनुभव वाले बिब्बी ने 2012 में खेल से अवकाश ग्रहण कर कोचिंग पर ध्यान दिया। उन्होंने AAU सर्किट से शुरुआत की और खुद अपना प्रोग्राम "टीम बिब्बी" तैयार किया जिसमें उनका उस समय नौ वर्ष का बेटा और किंग्स का भावी फॉरवर्ड मार्विन बैगली द थर्ड भी शामिल थे। इसके अगले वर्ष बिब्बी अपने विद्यालय, शैडो माउंटेन हाई स्कूल के हेड कोच बने और उसके लगातार चार बार स्टेट चैंपियनशिप जीतने में सहायक बने।

जब गर्मी का मौसम आता है तब वे अपना व्यायाम का समय बढ़ा देते हैं और शरीर को दिन-रात वेट-ट्रेनिंग और बास्केटबॉल प्रैक्टिस में झोंक देते हैं। उनका आकार बढ़ गया है और उनकी गति कुछ धीमी हुई है लेकिन ख़िताब जीतने की उनकी इच्छा उतनी ही तीव्र बनी हुई है।

“मैं इस खेल से प्यार करता हूँ,” वे कहते हैं। “मैं घर में तब तक वर्क-आउट करता हूँ, जब तक खेलने का समय नहीं हो जाता, और फिर बाहर जाकर जो कर सकता हूँ, करता हूँ। मैं अब भी बाहर जाकर खेल को अपना सर्वश्रेष्ठ देता हूँ।"

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